साधारणतया, लेख या निबन्ध जीवन के सार्वजनिक मान्यताओं और धारणाओं को संक्षिप्त रूप से प्रकट करते हैं क्यों कि पढ़नेवाले उसे सुगमतापूर्वक स्वीकार और सम्मिलित इसलिए करते हैं क्यों कि उनके लिए वे यथार्थ हैं, यह न समझते हुए कि यदि संसार भ्रामिक है जैसे ऋषियों ने घोषित किये हैं, वे किसी भी तरह यथार्थ या सत्य नहीं हो सकते। यहाँ जो भी लेख प्रस्तुत किये गये हैं, वे गहराई से हर मान्यता की प्रामाणिकता का परीक्षण करते हैं क्यों कि मान्यतायें, मनुष्य को स्वतन्त्रित रूप से जीने के बजाय, उसे बन्धन में बाँध रखते हैं। डॉ:शंकर के लेख को छापने के लिए साहस चाहिए क्यों कि सशर्त मन की प्रथा को छोट न पहुँचाने का भय रहता है और साथ-साथ यह भी समझना कि यथार्थ की लोकप्रिय भ्रांत धारणा के सुरक्षित-घरों में शरण लेना समझदारी नहीं क्यों कि वह ज्ञानोदय को अपने आप प्रदर्शित करने में रोकता है।

 

 

The Author

 

Decisions

05-04-2011

Sophisticated Knowledge

16-03-2011

Happening

05-03-2011

Beyond the Mind

11-02-2011

The Enlightened. The Knowledgeable

03-08 2010

Academy of Absolute Understanding

15-07-2010

Health

17-03-2010

Past

12-03-2010

Present

11-03-2010

Non-Dualism

08-03-2010

Future

04-03-2010

Word

02-03-2010

Action

28-02-2010

Absolute Understanding

16-02-2010

Planning

17-01-2010

Time and Date

07-01-2010

Responsibility and Quilt

05-01-2010

Life after Death

02-01-2010

Evolution and Creation

01-01-2010

True Identity

11-11-2009

Interview Evolution of Mind

24-10-2009

Soul

26-09-2009

Time, Elements and Man

11-09-2009

Oneness

08-09-2009

Emptiness

06-09-2009

To be Enlightened

06-09-2009

Happiness

17-03-2009

Wisdom

11-03-2009

Time and Money

07-03-2009

More

04-03-2009

Family

25-02-2009

Old Age

21-02-2009

Right and Wrong

18-02-2009

Devil

16-02-2009

Grace

13-02-2009

Children

11-02-2009

Lies

28-01-2009

Journey

31-12-2008

Finance

10-12-2008

Life

28-11-2008

Yoga

14-11-2008

Spiritualists

31-10-2008

God

24-10-2008

Death

17-10-2008

Hinduism

10-10-2008

Religion and Philosophy

26-09-2008

Complaint

12-09-2008

Meditation

08-08-2008

Evil

04-07-2008

Trust

06-06-2008

Gurus

09-05-2008

Pros and Cons

02-05-2008

Mind

25-04-2008

Enlightenment

18-04-2008

The Real and the Illusory

11-04-2008

The Good and the Righteous

04-04-2008

Bhagvad Gita and Yoga

28-03-2008

यथार्थता

05-10-2007

Perception and Experience

01-06-2007

Art and Literature

12-01-2007

ज्ञान और समझ

01-12-2006

Spiritual Encyclopedia

01-12-2006

Catastrophe

01-07-2005

New Future and Changing Times

01-03-2005

The End of Times is the Beginning of New

01-02-2005

Light and Darkness

01-04-2004

The Most Important Spiritual Questions of Our Time

01-11-2003

Spontaneity

01-02-2003

In the House of God

01-04-2002

What is Love?

01-03-2002

Vienna interview

23-06-2001

Impressions of a Satsang

01-06-2000

Belgium Interview

01-05-2000

Questionnaire

01-04-2000

He Gives Voice to the Absolute

01-04-1999

Making God Laugh

01-12-1998